केंद्र सरकार ईडब्ल्यूएस आरक्षण को 10% से बढ़कर 14% करें - मकराना
- आबू रोड में सोमवार को करणी सेना का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन शुरू
आबूरोड (किशन दहिया)
राजस्थान में होने वाले पंचायत चुनावों से पहले राजपूत समाज ने अपनी मांगों को लेकर सक्रियता बढ़ा दी है. 11 सूत्री मांगो को लेकर सिरोही के आबूरोड में श्री राजपूत करणी सेना का दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय अधिवेशन का शुभारंभ सोमवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने दीप प्रज्वलित कर किया जिसमें करीब 24 प्रदेश के प्रदेश अध्यक्षों के अलावा जिला अध्यक्ष व महामंत्री भाग ले रहे हैं इससे पूर्व सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष मकराना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि समाज ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए मिलने वाले आरक्षण ईडब्ल्यूएस को बढ़ाने की मांग की है उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पूर्व व्रती गहलोत सरकार द्वारा ईडब्ल्यूएस में किए गए सरलीकरण के तहत ही कार्य करें जिससे देश भर के राजपूत समाज के अलावा भी कहीं समाजो को इसका फायदा होगा इनमें सबसे प्रमुख इडब्लूएस आरक्षण को 10% से बढ़ाकर 14% करने की मांग है इसके साथ ही केंद्र स्तर पर इडब्लूएस आरक्षण में सरलीकरण लागू करने और पंचायती और निकाय चुनावों में इसे लागू करने पर भी जोर दिया गया. राष्ट्रीय अध्यक्ष मकराना ने कहा कि सोमवार को हुए राष्ट्रीय अधिवेशन के शुभारंभ अवसर पर करीब चार बिंदुओं पर चर्चा की गई वहीं दूसरे दिन मंगलवार को अलग-अलग दो सत्र आयोजित होंगे जिसमें करीब एक दर्जन से भी ज्यादा बिंदुओं पर चर्चा होगी इस मौके पर प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सिंह खजूरी, प्रदेश प्रभारी प्रहलाद सिंह पांचलवाडा, संभाग प्रभारी मनमोहन सिंह देवड़ा, जिला अध्यक्ष नारायण सिंह बागसीन, जिला प्रभारी बलवंत सिंह राठौड़ सहित प्रदेश भर के कहीं पदाधिकारी व करणी सेना के कार्यकर्ता मौजूद रहे
पंचायत चुनाव से पहले मांगों का बहीखाता
पंचायत व निकाय चुनाव से पहले होने वाले करणी सेवा के इस राष्ट्रीय अधिवेशन को राजनीतिक नजरिए से काफी अहम माना जा रहा है. समाज ने सिर्फ इडब्लूएस आरक्षण बढ़ाने की मांग नहीं की, बल्कि सीधे तौर पर पंचायत व निकाय चुनावों में भी इडब्लूएस आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव रखा है. इसका सीधा मतलब है कि समाज चाहता है कि ग्रामीण स्तर के चुनावों में भी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को प्रतिनिधित्व का मौका मिले.
क्यों अहम हैं ये मांगें
पंचायत चुनाव राजस्थान की राजनीति की नींव होते हैं. ग्रामीण इलाकों में होने वाले ये चुनाव बताते हैं कि गांवों में किस पार्टी का दबदबा है. अगर राजपूत समाज अपनी मांगों को लेकर एकजुट होता है और पंचायत चुनावों में इडब्लूएस आरक्षण को मुद्दा बनाता है, तो इसका सीधा असर राजनीतिक पार्टियों पर पड़ेगा. राजपूत समाज राजस्थान में एक बड़ा और प्रभावी वोट बैंक है. अगर ये समाज एकजुट होकर किसी भी पार्टी के खिलाफ जाता है, तो उस पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है. पंचायत चुनावों में EWS को लागू करने की मांग करके समाज सीधे ग्रामीण वोटरों को साधने की कोशिश करेंगे


