*आहोर।* मौलाना आजाद विश्वविद्यालय, जोधपुर ने इतिहास के एक उपेक्षित अध्याय को पुनर्जीवित करने वाले महत्वपूर्ण शोध कार्य के लिए संजय सिंह चौहान को पीएचडी उपाधि प्रदान की है। उन्होंने ‘मारवाड़ का संघर्षशील व्यक्तित्व: राव चन्द्रसेन राठौड़’ विषय पर अपना शोध कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया।
यह शोध कार्य इतिहास विभाग, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी संकाय के आचार्य एवं विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) यशवंत शौर्य के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ।
*शोध के दौरान अकादमिक सक्रियता*
शोध अवधि के दौरान डॉ. संजय सिंह चौहान ने विभिन्न संगोष्ठियों, व्याख्यानमालाओं, सेमिनारों एवं अकादमिक समारोहों में सक्रिय भागीदारी निभाई। साथ ही उनके कई शोध पत्र भी प्रकाशित हुए, जिससे उनके शोध की गंभीरता और गुणवत्ता प्रमाणित होती है।
*‘भूला-बिसरा राजा’ नहीं, प्रथम स्वतंत्रता सेनानी*
अपने शोध विषय पर प्रकाश डालते हुए डॉ. संजय सिंह चौहान ने बताया कि इतिहास में राव चन्द्रसेन राठौड़ को लंबे समय तक उपेक्षित रखा गया, जिसके कारण वे ‘भूला-बिसरा राजा’ बनकर इतिहास के पन्नों में गुमनाम हो गए।
उन्होंने शोध में तथ्यात्मक साक्ष्यों के साथ सिद्ध किया कि राव चन्द्रसेन राठौड़ मध्यकालीन भारत के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए राजसी वैभव का त्याग किया और तात्कालिक केन्द्रीय सत्ता के विरुद्ध आजीवन संघर्ष का मार्ग चुना।
*विश्वविद्यालय परिवार का मार्गदर्शन व सहयोग*
शोध कार्य के दौरान मौलाना आजाद विश्वविद्यालय के आधार स्तंभों का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हुआ। इसमें विशेष रूप से श्री मोहम्मद अतीक (चेयरपर्सन), डॉ. जमील काजमी (प्रेसीडेंट), प्रो. (डॉ.) मो. तालेउज्जमां (रिसर्च डीन), सोशल साइंसेज एवं ह्यूमैनिटीज के डीन डॉ. इनाम हलाही, डॉ. रेहाना, प्रो. (डॉ.) अरविन्द परिहार (जेएनवीयू, जोधपुर) का सानिध्य एवं आशीर्वाद तथा डॉ. किशनलाल का उल्लेखनीय सहयोग रहा।
