राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार "मनरेगा बचाओ संग्राम जन आंदोलन" के तहत आज 30 जनवरी, शुक्रवार सुबह 11.00 बजे ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की और से श्री जलन्धर नाथ जी सर्किल बागरा एवम दोपहर 3.00 बजे सियाणा मंडल कांग्रेस द्वारा बस स्टैंड सियाणा में कांग्रेसजन की बैठक एवम शांतिपूर्ण धरना आहोर कांग्रेस प्रत्याशी सरोज चौधरी के नेतृत्व में आयोजित किया हुआ।




जालोर (संजीव कुटल)

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार "मनरेगा बचाओ संग्राम जन आंदोलन" के तहत आज 30 जनवरी, शुक्रवार  सुबह 11.00 बजे ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की और से श्री जलन्धर नाथ जी सर्किल बागरा एवम दोपहर 3.00 बजे सियाणा मंडल कांग्रेस द्वारा बस स्टैंड सियाणा में कांग्रेसजन की बैठक एवम शांतिपूर्ण धरना आहोर कांग्रेस प्रत्याशी सरोज चौधरी के नेतृत्व में आयोजित किया हुआ।



कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए आहोर कांग्रेस प्रत्याशी सरोज चौधरी ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने मनरेगा के मूल स्वरूप को बदल दिया है जिससे ग्रामीण आजीविका प्रभावित हुई है। महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) जिसे वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया था, एक अधिकार-आधारित कानून है जो प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मजदूरी रोजगार की मांग करने का वैधानिक अधिकार देता है। कानून के तहत् राज्य सरकार 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिये बाध्य है अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देय होता है। यही वैधानिक गारंटी मनरेगा की मूल और परिभाषित विशेषता है। मनरेगा ग्रामीण आजीविका सुरक्षा की रीढ़ रहा है। यह प्रतिवर्ष 5-6 करोड परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराता है, मजबूरी में होने वाले पलायन को कम करता है, ग्रामीण मजदूरी बढाता है और टिकाऊ सामुदायिक परिसम्पतियों का निर्माण करता है। इसकी मांग-आध् पारित संरचना, सुनिश्चित मजदूरी और सीधे बैंक भुगतान की व्यवस्था से विशेष रूप से महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और वंचित समुदायों को लाभ हुआ है, जिनमें महिलाओं की हिस्सेदारी कुल कार्य दिवसों का लगभग 60 प्रतिशत है। नया VB-GRAM-G अधिनियम इस पूरे ढांचे से एक मौलिक विचलन है। यह काम की वैधानिक गारंटी को समाप्त करता है, निर्णय प्रक्रिया का केन्द्रीकरण केन्द्र सरकार के हाथों में करता है, ग्राम सभाओं और पंचायतों को कमजोर करता है तथा केन्द्र के मजदूरी अंशदान को लगभग 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर देता है, जिससे वित्तीय बोझ राज्यों और श्रमिकों पर डाल दिया जाता है। बजट सीमित आवंटन, कृषि के चरम मौसम में कार्य पर प्रतिबंध और मजदूरी सुरक्षा प्रावधानों का कमजोर होना अनिवार्य रूप से रोजगार में कमी, मजदूरों के दमन और ग्रामीण संकट में वृद्धि का कारण बनेगा। कार्यक्रम से महात्मा गाँधी के नाम को हटाया जाना भी श्रम की गरिमा और ग्राम स्वराज के उन मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास दर्शाता है जिन परमनरेगा आधारित है।


कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सवाराम पटेल ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा मनरेगा के नाम के साथ साथ उसका मूल मकसद भी बदल लिया गया है जिससे गांव में बैठे गरीब व्यकि को हानि उठानी पड़ रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से VB-GRAM-G विधेयक को वापस लेने और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग की।


कार्यक्रम में आहोर कांग्रेस प्रत्याशी सरोज चौधरी,वरिष्ठ कांग्रेसी सवाराम पटेल,पूर्व प्रधान प्रदीप सिंह सियाणा जिला संगठन महासचिव विरेंद्र जोशी, आहोर ब्लॉक अध्यक्ष गजेन्द्र सिंह डोडियाली,सोनाराम मेघवाल, रामगोपाल अग्रवाल, पूर्व प्रधान पदमाराम सरगरा, कुशाल सिंह राजपुरोहित, महिला जिलाध्यक्ष संतोष कंवर,मंडल अध्यक्ष पीरसिंह बालोत, शंकर अग्रवाल, युद्धवीर सिंह , प्रदीप भट्ट,लक्ष्मी घांची, आसिफ खां,शाकिर खां, प्रवीण लुकड,चांद मोहम्मद, पोलाराम मेघवाल,मिलापचंद जैन, महमूद खां, तेजपाल परमार रूपाराम मेघवाल, ईश्वर सिंह, मनोज, सुरेश मेघवाल सहित तमाम कांग्रेसजन उपस्थित थे।




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